'वाऊ! देखो आज चाँद कितना खूबसूरत नजर आ रहा है'! इशिका ने चहकते हुए कहा।
'हर खूबसूरती के पीछे कोई बड़ी मुसीबत छुपी होती है मैडम'। अमित किसी दार्शनिक की भांति गंभीर भाव से बोला, हालांकि वो बात इसने सिर्फ इशिका को चिढ़ाने के लिए कही थी।
'अच्छा बेटा! तो अब मैं मुसीबत नज़र आने लगी हूँ तुम्हे'! इशिका ने अमित की बांह पर ज़ोर से चिकोटी काटी।
'अरेss..क्या कर रही है पागल लड़की, मेरा बैलेंस बिगड़ जाएगा' अमित ने डगमगाती हुई बुलेट संभालते हुए कहा, उस समय उसकी बुलेट अस्सी की रफ्तार से खाली सड़क पर दौड़ रही थी।
रात के लगभग बारह बज चुके थे और वो दोनों राजनगर रसालगढ़ हाईवे पर जाने के लिए बाईपास रोड से गुज़र रहे थे। यह बाईपास रोड रसालगढ़ के बीहड़ जंगल के बीच से गुज़रती थी।
'हाहाहा... पागल हूँ मैं? अभी दिखाती हूँ तुझे'!! अमित के पीछे बैठी इशिका उसे गुदगुदी करने लगी, अमित के लिए बुलेट संभालना मुश्किल हो गया।
'हाहाहा...मत कर इशिका की बच्ची...तू पक्का एक्सीडेंट करवाएगी'। बुलेट खाली सड़क पर किसी सांप की भांति आड़ी तिरछी रेंगती हुई चल रही थी। उस बाईपास रोड पर दिन में भी मुश्किल से इक्कादुक्का गाड़ी गुज़रती थी, रात में वहां किसी दूसरी गाड़ी के होने का सवाल ही नहीं था इसलिए अमित निश्चिंत था। बस वो यह ध्यान रखने की कोशिश कर रहा था कि इशिका की शरारत में उसका बैलेंस ऑफ ना हो जाए।
'मुझे पागल बोला ना! इतना तो पता होगा कि पूरे चाँद की रात पागलों पर क्या...'
'इशिकाss'
जंगल की तरफ से किसी चार पैरों वाली आकृति ने रोड पर छलांग लगाई। अंधेरे और बुलेट की हेडलाइट में अमित उस आकृति को साफ नहीं देख पाया, उसे सिर्फ कंचों जैसी चमकती दो आँखें दिखाई दीं। वो आकृति कोई बिल्ली या लोमड़ी नहीं हो सकती थी, उसकी हाइट कम से कम पांच फुट थी।
अमित ने बुलेट फुर्ती से दायीं ओर काटी, वो उस आकृति से बुलेट का टकराव होने से बचाना चाहता था।
बुलेट आकृति के बगल से गुज़री।
वातावरण हिंसक भेड़िए की हुंकार से गूंज उठा।
'अमित संभालो वो हमपर झपट रहा...'
इशिका अपनी बात पूरी ना कर पाई, आकृति के नुकीले पंजों का ज़ोरदार वार अमित की पीठ से टकराया, बुलेट एक झटके के साथ लहराई और फिर इशिका के चारों तरफ अंधकार छा गया।
जब इशिका की आंख खुली तब आसमान में बादल छाए हुए थे। इन बादलों के बीच से पूरे चाँद की चांदनी ठीक उसके जिस्म पर पड़ रही थी।
इशिका के कपड़े जगह जगह से फ़टे हुए थे और वो पानी में भीगी हुई थी। उसे अहसास हुआ कि वो एक्सीडेंट वाली जगह पर नहीं थी।उसका जिस्म कंक्रीट की सड़क पर नहीं बल्कि नरम मिट्टी और घास पर था। जंगली घास की गंध और आस पास झींगुरों का शोर उसे साफ सुनाई दे रहा था।
इशिका का सर बुरी तरह चकरा रहा था, वो पीठ के बल लेटी हुई थी। जिसने खुद को उठाने की कोशिश की, उसके पूरे जिस्म में दर्द की लहर दौड़ गई। ये दर्द की लहर उसके दाहिने पैर से उठ रही थी। शायद उसके पैर की हड्डी टूट गई थी।
'अहह... अ.. अमित' बड़ी मुश्किल से इशिका के हलक से कराहती हुई धीमी आवाज़ निकली।
'अ... अमित। कहां हो तुम'?
हर्ररsss...जंगली भेड़िए की गुर्राहट इशिका के कानों में पड़ी। ठीक वैसी ही आवाज़ जैसी उसने एक्सीडेंट के समय सुनी थी।
बड़ी मुश्किल से अपने जिस्म में मौजूद ताकत और इच्छाशक्ति का एक एक कतरा लगा कर किसी तरह इशिका ने अपना सर उचकाया।
इशिका ने देखा कि वो घने जंगल मे एक झील के किनारे लेटी हुई थी। बादल होने की वजह से वहां काफी अंधेरा था।
इशिका ने महसूस किया कि वातावरण में जंगल और वनस्पतियों की गंध के अलावा एक और गंध मिली हुई थी। एक खास, ताँबाई गंध...जैसी खून की होती है।
ठीक उसी समय आसमान से बादल छंटे, पूरे चाँद की रोशनी ने झील के पानी पर प्रतिबिम्बित होकर जैसे वातावरण में एक श्वेत चादर बिछा दी।
चांदनी के उस प्रकाश में इशिका को अपनी आँखों के समक्ष जो दृश्य नज़र आया उसने उसके होश उड़ा दिए।
इशिका के ठीक सामने, झील के पार चार पैरों वाली आकृति अमित के मृत शरीर पर झुकी हुई थी। वो एक पांच फुट ऊंचा भेड़िया था जो अपने पैने दांतों से अमित के जिस्म की खाल कच्चे धागों की तरह उधेड़ रहा था।
पूर्णिमा की रौशनी जैसे ही उस भेड़िए पर पड़ी, भेड़िए के स्वरूप में परिवर्तन होने लगा। चार पैरों की जगह वो भेड़िया अपने पिछले दो पैरों पर इंसान की तरह खड़ा हो गया। उसका कद भी बढ़कर पांच फुट से आठ फुट हो गया था। पूरे चाँद की रौशनी ने उस जंगली भेड़िए को खूंखार वेयरवोल्फ बना दिया।
उसने अपना मुंह ऊपर चाँद की ओर उठाया और ज़ोर ज़ोर से रोने लगा।
इशिका का लहू सर्द होकर जम गया। उसके चेहरे की रंगत सफेद पड़ गई जैसे शमशान की राख उसके चेहरे पर पुती हुई हो।
वेयरवोल्फ ने एक नज़र इशिका को देखा फिर पूरी हिंसकता से अमित के मृत शरीर पर झुका और उसका पेट फाड़ कर उसकी अंतड़ियाँ निकालने लगा।
वो दृश्य इतना वीभत्स था कि इशिका खुद को उल्टी करने से नहीं रोक पाई।
मानवभेड़िये का ध्यान एकबार फिर इशिका की ओर आकर्षित हुए। चांद की रौशनी में उस हैवान का चेहरा बहुत ही वीभत्स नज़र आ रहा था। उसकी कन्जी आँखों से खूँखारता टपक रही थी और उसके जबड़ों से अमित की लाश के चिथड़े और लहू।
हैवान अब इशिका की ओर कदम बढ़ा रहा था। उसकी हैवानियत की प्यास अभी बुझी नहीं थी...
'एक मिनट...एक मिनट'!!
'व्हाट डू यू मीन बाई हैवानियत की प्यास अभी बुझी नहीं थी! आर वी मेकिंग ए शॉर्ट फिल्म ऑर सम ट्रैशी रामसे स्टाइल हॉरर फिल्म फ्रॉम 80s'! इशिका ने मुँह बनाते हुए पूछा।
अमित और शांतनु एकदूसरे का मुंह देखने लगे।
'ऐंड वन मोर थिंग, ये इशिका...आई मीन कैरेक्टर के कपड़े फ़टे हुए और गीले होने के पीछे क्या लॉजिक है'?
'हिट्स ऐंड लाइक्स! पीपल वॉन्ट ग्लैमर, एक्सपोज़र, सेंशुऐलिटी! जबतक हम वो नहीं देंगे लोग हमारे यूट्यूब चैनल को सब्सक्राइब नहीं करेंगे। शॉर्ट फिल्म को लाइक नहीं करेंगे...मतलब इन्वेस्टर्स का पैसा रिकवर नहीं होगा'।
'यू नो आई हेट दिस ब्लेटेंट फीमेल ऑब्जेक्टिफिकेशन। कोई लॉजिक नहीं, बस अपनी परवर्टेड फैंटेसी को सेटिस्फाई करने के लिए कुछ भी कचरा डाल दो'।
'अरे लॉजिक है ना, वो लड़की को भेड़िए ने पानी मे डाला और फिर निकाल कर साइड पे रख दिया'। शांतनु फटाफट बोला।
'क्यों? लड़की ना हुई डिप टी बैग हो गई, पानी मे डाला फिर निकाल कर साइड में रख दिया। लुक शांतनु, मैं फ़िल्म में तभी काम करूँगी जब मुझे स्क्रिप्ट और अपना रोल दोनो अपील करेंगे'।
'अरे यार इशिका ये क्या क्या मज़ाक है!! इन्वेस्टर्स फंडिंग दे चुके हैं, सारी तैयारी हो चुकी है, कल से शूट स्टार्ट है...अब एन टाइम पे तू बैकआउट करेगी तो कैसे चलेगा'! शांतनु लगभग गिड़गिड़ाते हुए बोला।
'भाई एक इश्यू मेरा भी है। ये पेट फाड़ कर अंतड़ियां निकालने वाला सीन कैसे होगा। वीएफएक्स का बजट नहीं है अपना'। किशोर जो अबतक चुपचाप खड़ा था सोचपूर्ण मुद्रा में बोला।
'अरे उसकी टेंशन मत ले, वेयरवोल्फ की कॉस्ट्यूम के साथ जुगल दादा बकरे की असली अंतड़ियां भी ला रहा है। वीएफएक्स इंडिया में आने से पहले जुगल दादा ही सब हॉरर फिल्म्स में मेकअप का काम करता था। ये अमित को लिटा कर उसके ऊपर बकरे की अंतड़ियां ऐसे लगाएंगे कि बिल्कुल नेचुरल लगेगी'।
शांतनु ने एक नज़र अपने बगल में खड़े जुगल दादा पर डाली, जुगल दादा ने मुंह मे पान की पीक भरे हुए आश्वासनपूर्ण ढंग से सर हिलाया।
'फिर तू वो वेयरवोल्फ वाला कॉस्ट्यूम पहनकर वो अंतड़ियां मुंह में ले...'
'ओ भाई! एक मिनट! आई एम नॉट पुटिंग दैट शिट इन माई माउथ'। किशोर ने अमित की बात बीच मे ही काटी।
'अबे कल ही रो रहा था तू नॉनवेज खाने को'!
'अबे तंदूरी चिकेन और बकरे की कच्ची अंतड़ियों में फर्क होता है भाई'! किशोर चिढ़ कर बोला।
'वैसे भी मुझे इस रोल में कोई इंटरेस्ट नहीं था! मेरी तो शक्ल भी नज़र नहीं आ रही इस रोल में। अब ये लिमिट है भाई...ये मुझसे नही होगा, ऐसा कर तू खुद ही बन जा वेयरवोल्फ'।
शांतनु ने बहुत मुश्किल से अपने अंदर उमड़ रहे आवेश को संभाला।
'देखो गाइज़, कल से शूट स्टार्ट है। आई नो अभी चीजें बहुत मुश्किल लग रही हैं लेकिन ट्रस्ट मी एक बार ये फ़िल्म बन गई ना तो आग लगा देगी'।
'तू ध्यान रखियो शांतनु, ऐसा ना हो कि ये फ़िल्म तेरे कैरियर में ही आग लगा दे'। अमित बोला।
शांतनु और जुगल दादा को छोड़कर बाकी सभी ठहाके मार कर हंस पड़े।
शांतनु चुपचाप वहां से उठा और बाहर निकल गया।
उसके फ्लैट पर शूट स्टार्ट होने से पहले यह आखरी मीटिंग थी।
शांतनु पिछले 6 सालों से डायरेक्टर बनने के लिए स्ट्रगल कर रहा था लेकिन कुछ छोटे-मोटे ऐड फिल्म्स और डॉक्युमेंट्रीज़ के अलावा अभी तक कुछ कर नहीं पाया था।
यह शॉर्ट फिल्म उसके लिए आखरी मौका थी, दुनिया के सामने खुद को साबित करने के लिए।
शांतनु के पास ना पैसा था ना ही संसाधन, इसीलिए फ़िल्म में काम करने के लिए उसने अपने दोस्तों को तैयार किया था। बीते 6 महीनों में शांतनु ने अपने दिन रात एक कर दिए थे इस शॉर्ट फिल्म प्रोजेक्ट के पीछे।
बहुत मुश्किलों से उसने एक-दो लोकल बिज़नेस हाउसेस को फंडिंग के लिए तैयार किया था हालांकि फंडिंग के नाम पर जो पैसा मिल था उसका आलम नंगा नहाएगा क्या और निचोड़ेगा क्या वाला ही था फिर भी अपनी सारी सेविंग्स मिला कर किसी तरह उसने एक शॉर्ट फ़िल्म के बजट का इंतजाम कर लिया था।
शांतनु को यकीन था कि एक बार उसकी शॉर्ट फिल्म बन कर रिलीज़ होगी तो बड़े बड़े प्रोडक्शन हाउसेज उसे साइन करने को लाइन लगाएंगे। लेकिन उसकी टीम का रवैया उसकी सारी मेहनत और सच होने की कगार पर खड़े सपनों को बर्बाद कर सकता था।
'मैं ऐसा नहीं होने दूंगा। अपनी फिल्म किसी को बर्बाद नहीं करने दूंगा'। शांतनु ने मन ही मन सोचा।
शांतनु ने जेब से सिगरेट निकाल कर सुलगा ली। पिछले 6 महीनों में शांतनु चेन स्मोकर बन चुका था। बिना सिगरेट लबों से लगाए पांच मिनट भी काटना उसके लिए मुश्किल था।
एक अदद गहरा कश खींचते ही शांतनु को अपने दिमाग की नसों के तनाव में राहत महसूस हुई।
उसी समय उसके मोबाइल की रिंग बजी, केविन का कॉल था।
अपनी टीम में दो ही मेम्बर्स पर शांतनु आंख बंद करके विश्वास करता था, जुगल दादा और केविन। शांतनु के टैलेंट में खुद शांतनु के अलावा किसी को अगर सच्चा विश्वास था तो वो यही दोनो थे।
केविन एक वॉना बी सिनेमेटोग्राफर था जोकि शांतनु के लिए उसकी ऐड फिल्म्स में काम कर चुका था और फिलहाल उसके लिए इस प्रोजेक्ट में मल्टीटास्किंग कर रहा था।
'हेलो केविन। काम हो गया'?
'एकदम चकाचक हो गया शांतनु भाई। यहां लोकेशन पर अपने लोकल गाइड गुरुमंग के साथ मिलकर मैंने सारा ज़रूरी सेटअप करवा लिया है। अब कल सुबह सुबह रसालगढ़ जाकर रिफ्रेशमेंट का और बाकी कुछ ज़रूरी सामान ले आऊंगा। आपलोग दोपहर तक यहां पहुंच जाना ताकि ऐनी हाऊ सन डाउन होते ही अपन लोग शूट स्टार्ट कर दें'।
'ठीक है केव! कल मिलते हैं'।
फ़िल्म के लिए जगह की रेकी शांतनु और केविन पहले ही कर चुके थे। राजनगर और रसालगढ़ के बीच पड़ने वाले पहाड़ी जंगल जोकि ब्लैक ऑर्किड वुड्स के नाम से जाने जाते थे वहां जंगल के बीच एक स्पॉट एन उनकी जरूरत के हिसाब का था।
शांतनु यहां राजनगर में अपनी एक्टिंग टीम को रिहर्स करवा रहा था और केविन लोकेशन पर लाइट्स, कैमरा और टेंट्स वगैरह लगवाने की व्यवस्था कर रहा था।
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'क्या ज़बरदस्त जगह है ये! बिल्कुल वैसी ही जैसी तुमने स्क्रिप्ट में लिखी है शांतनु'। अमित आश्चर्य से जंगल मे ऊंचे देवदार पेड़ों के बीच बनी झील देख रहा था।
शांतनु के होठों के बीच सिगरेट दबी हुई थी, एक हल्की मुस्कान के साथ धुएं की लकीर उसके लबों से बाहर निकली।
'वैसे आसमान में बादल हैं, अगर रात होने पर चाँद के आगे बादल आ गए तो हम शूट नहीं कर पाएँगे'। अमित ने आसमान की तरफ देखते हुए कहा।
'चाहे कुछ भी हो जाए, शूटिंग तो आज होकर रहेगी'। शांतनु अपने नथुनों से सिगरेट का धुआं उगलते हुए बोला।
अमित ने शांतनु को देखा, ऐसा लग रहा था जैसे शांतनु ने यह बात फरमान जारी करने के अंदाज़ में कही हो।
'सबलोग फटाफट लंच कर लो और उसके बाद कुछ रेस्ट ले लो। हमलोग सूरज ढ़लते ही शूट स्टार्ट करेंगे और आज रात भर में शूटिंग रैपअप कर लेंगे, वरना अगले फुल मून तक के लिए काम अटक जाएगा'। शांतनु सबको समझाते हुए बोला।
दिन केे एक बज रहे थे। शाम सात बजे से शूटिंग स्टार्ट होनी थी।
अमित, किशोर, केविन, इशिका, जुगल दादा और शांतनु सभी उस झील से कुछ ही दूरी पर लगे उनके कैम्प की तरफ बढ़ गए।
वहां पर जंगल मे बीच छे टेंट एक गोलाई में लगे हुए थे। यह पूरा एरिया देवदार के बड़े-बड़े पेड़ों से घिरा हुआ था। टेंट्स के बीचों बीच सूखे पत्तों और टहनियों को इकट्ठा करके बनाई बोनफायर जल रही थी जिसपर गुरुमंग फिलहाल तीतर भून रहा था। गुरुमंग पंद्रह साल का छोटे कद का पहाड़ी लड़का था जो उस पहाड़ी जंगल के चप्पे-चप्पे से वाकिफ था।
'वाह! अच्छी खुशबू आ रही है गुरुमंग'। किशोर खुश होते हुए बोला।
'थैंक्यू साब जी'!
'अपना गुरुमंग सिर्फ गाइड ही नहीं कुक भी कमाल का है' केविन ने गुरुमंग की पीठ थपथपाई।
'ट्राय दिस साबजी। यहां के पहाड़ी बकरे के गोश्त का पुलाव है ये'। गुरुमंग ने खुश होते हुए अपने पास रखी बड़ी सी हांडी में से पुलाव एक डिस्पोज़िबल प्लेट पर निकाला और किशोर की तरफ बढ़ा दिया।
किशोर उंगलियां चाटता रह गया। 'अबे...अबे...ये क्या बना दिया मेरे भाई। गुरुमंग तू तो हीरा है, यहां जंगल मे क्यों पड़ा है। मेरे साथ चल भाई, मेरा पर्सनल बावर्ची बन जा। कसम से मज़ा आ गया'।
इसके बाद तो सभी खाने पर टूट पड़े।
'तेरा चेला गुरुमंग वाकई कमाल का बावर्ची है किशोर'। जुगल दादा बड़ी सी डकार मारते हुए बोला।
'हाँ, पिछले साल ब्लैक ऑर्किड वुड्स पर डॉक्यूमेंट्री शूट करते समय मैं इससे मिला था। तबसे ये मेरे साथ ही है, कमाल का लड़का है'। केविन बोला।
गुरुमंग का गोरा चेहरा अपनी प्रशंसा सुनकर गुलाबी हो गया।
'यार खाना तो वाकई मास्टर शेफ स्टैण्डर्ड का है, बस थोड़ा गला तर करने का भी इंतेज़ाम हो जाता तो...' अमित तीतर का लेग पीस नोचते हुए बोला।
'उसका भी इंतेज़ाम है भाई। जा बेटा गुरुमंग, भाग कर टॉनिक का डब्बा ले आइयो'। केविन ने गुरुमंग को आदेश दिया, गुरुमंग किसी आज्ञाकारी चेले की तरह एक टेंट की ओर बढ़ गया। जब गुरुमंग लौटा तो उसके हाथ मे एक संदूक जितने बड़े आकार का आइस बॉक्स था जोकि बीयर कैन्स से भरा हुआ था। सबकी बाछें खिल गईं।
'बस भाई, ये मिल गया तो मोक्ष मिल गया'।
'आराम से पियो गाइज़, डोंट गेट टू ड्रंक। हमें शाम से शूट भी स्टार्ट करना है'। शांतनु चिंतित भाव से बोला। खाना खत्म करते ही उसने नया सिगरेट सुलगा लिया था।
'रिलैक्स शान! शाम होने में अभी बहुत समय बाकी है। वैसे भी ये बियर है रम नहीं कि पी कर हमलोग आउट हो जाएंगे'। इशिका शांतनु को चिढाते हुए बोली।
खाने पीने का यह दौर लगभग एक घण्टा चला, उसके बाद सभी लोग आराम करने के लिए अपने अपने टेंट में चले गए। गुरुमंग ने सबके जाने के बाद खाना खाया और जगह की सफाई की।
गुरुमंग ने बोनफायर की आग बुझाई और बाहर खुले में ही एक पेड़ के नीचे लेट गया। शाम से पहले वो भी एक झपकी लेना चाहता था।
तभी सूखे पत्तों और झाड़ियों में हुई सरसराहट ने गुरुमंग का ध्यान खींचा। उसने गर्दन उचका कर चारों ओर देखा, कहीं कोई नज़र ना आया। गुरुमंग पुनः लेट गया और आँखें बंद कर ली। इस बार पहले से भी निकट कहीं से सरसराहट की आवाज़ उभरी।
पहाड़ी लड़का फौरन चौकन्ना होकर बैठ गया, कमरबन्द में खोंसी हुई खुखरी उसने हाथ मे ले ली।
'कौन है वहां'!!
कोई जवाब नहीं आया।
गुरुमंग अपनी जगह से उठा और बिना आवाज़ कदमों से चलते हुए झाड़ियों तक पहुंचा।
झाड़ियों के पीछे से एक हल्की गुर्राहट उभरी।
गुरुमंग ने हल्के से झाड़ी हटाई, पीछे एक पहाड़ी भेड़िया था जो शायद भुने मांस और खाने की गंध से वहां आया था।
भेड़िये की आंखें कंचों की तरह चमक रही थीं। गुरुमंग जानता था कि जानवर अंतर्मन का भय सूंघ लेते हैं। उसने अपना साहस कम नहीं होने दिया।
'गो!! गो!! जाओ यहां से'!! गुरुमंग ने दिलेरी से अपनी खुखरी वाला हाथ हवा में हिलाया। भेड़िया कुछ क्षण उसे देखता रहा फिर पीछे मुड़ कर वापस जंगल मे भाग गया।
गुरुमंग ने चैन की सांस ली।उसने वापस लौट कर बोन फायर दोबारा जला दी ताकि फिर कोई जंगली जानवर उधर ना आए।
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इशिका की उल्टियां रुकने का नाम नहीं ले रही थीं, उसकी तबियत बिगड़ती ही जा रही थी।
'शांतनु, हमें शूट कैंसिल करनी पड़ेगी। इशिका की हालत सुधरने के बजाए और खराब होती जा रही है। हमें राजनगर लौट कर इसे हॉस्पिटल ले जाना होगा'। अमित चिंतित भाव से बोला।
'हम ऐसा नहीं कर सकते अमित, अभी तो शूट स्टार्ट भी नहीं हुई है। शाम हो रही है, कुछ देर में चांद निकल आएगा, हमें तैयारी करनी...' शांतनु जैसे बदहवासी में बड़बड़ा रहा था, अमित ने झुंझलाते हुए उसकी बात बीच मे काटी। 'आर यू आउट ऑफ योर माइंड शांतनु! ऐसी स्थिति में तुम शूटिंग के बारे में सोच भी कैसे सकते हो'!!
'अरे उल्टी ही तो हो रही है, ठीक हो जाएगी। किसने कहा था सूअरों की तरह ठूस-ठूस कर खाने और उसपर लीटर भर दारू पीने को। ब्लडी फ्री लोडर्स'!! शांतनु गुस्से में बिफर उठा।
'माइंड योर लैंग्वेज शांतनु ऐंड लिसेन टू मी..'
'नो यू लिसेन टू मी, मैंने इस फ़िल्म के पीछे अपना सबकुछ लगा दिया है। अपनी एक-एक पाई मैंने लगा दी ताकि ये फ़िल्म बन सके, इसके लिए तुम लोगों की हर वाजिब गैरवाजिब डिमांड पूरी करता रहा और अब तुमलोग मुझे ये सिला दे रहे हो'!
'अबे तो तुम्हारा सपना पूरा करने के लिए किसी को मरने दें क्या। होश की दवा करो भाई। शूटिंग आज नही हुई अगले महीने हो जाएगी'।
'उसका पैसा तुम्हारा बाप देगा!'
'ठहर जा भो$@#!#&*'!! अमित शांतनु के ऊपर टूट पड़ा।
शांतनु ने एक जबरदस्त मुक्का अमित के मुंह पर जड़ दिया। अमित को दिन में ही तारे नज़र आ गए। किशोर जोकि इशिका को संभाल रहा था यह देखकर शांतनु पर झपटा। दोनो आपस मे गुत्थम गुत्था हो गए। केविन और गुरुमंग भागते हुए वहां आये।
केविन ने किशोर को पकड़ा, गुरुमंग ने शांतनु को रोका।
'अब तो साला फुल एंड फाइनल पैकअप!! तू बना ले फ़िल्म अपनी'। किशोर क्रोध में फुफकारते हुए बोला।
'तू गाड़ी निकाल किशोर, हमदोनों इशिका को लेकर यहां से जा रहे हैं '। अमित ने भी खुद को संभाला।
शांतनु गुस्से में बिफरते हुए उन दोनों की ओर बढ़ा, केविन ने उसे बीच मे ही रोक लिया।
'नहीं शान भाई। झगड़ने से कुछ नहीं होगा, शूट ये लोग वैसे भी नहीं करने वाले। जस्ट लेट देम गो'।
शांतनु अंगारे जैसी आखों से अमित और किशोर को घूरता रहा, फिर एक झटके में उसने केविन से अपनी बांह छुड़ाई और वहां से चला गया।
केविन शांतनु के पीछे गया लेकिन तबतक आवेश में चलता हुआ शांतनु घने जंगल और ऊंचे पेड़ों के बीच कहीं गायब हो चुका था। हताश भाव से केविन वापस लौटा।
अमित और किशोर इशिका को उस एस यू वी में बैठा रहे थे जिससे वोलोग वहां आए थे। उस एस यू वी के बगल में एक क्रूजर खड़ी थी जिसमे केविन और गुरुमंग आए थे।
इशिका की उल्टियां रुक गईं थी लेकिन अब भी वो काफी बीमार नज़र आ रही थी।
'हम तीनों यहां से निकल रहे हैं जुगल दादा, यहां रुककर कुछ नही होना। अगर चाहो तो आप भी हमारे साथ आ सकते हो ' किशोर बोला।
जुगल दादा अनिश्चित भाव से खड़ा कभी केविन को और कभी उन लोगों को देख रहा था। गुरुमंग सामान चढ़ाने में उनकी मदद कर रहा था।
'मानता हूँ शान भाई को आपे से बाहर नहीं होना चाहिए था लेकिन तुमलोगों ने भी जो किया है वो बहुत गलत है। सरासर पीठ में छुरा घोपने वाला काम किया है'। केविन किशोर से बोला।
'शांतनु तो पागल है लेकिन तू तो समझदार है ना केव? इसकी हालात देख, क्या तुझे लगता है कि ऐसी स्थिति में ये शूटिंग कर सकती है'! किशोर ने गाड़ी में बैठी इशिका की तरफ इशारा करते हुए कहा।
'सवाल इशिका की तबियत का नहीं है, सवाल तुमलोगों के एटीट्यूड का है। तुमलोग शुरू से ही इस प्रोजेक्ट के लिए यूं काम कर रहे हो जैसे शांतनु पर कोई अहसान कर रहे हो'। केविन सख्त भाव से बोला।
'इसकी बकवास पर ध्यान मत दे किशोर, ये भी अपने गुरु की भाषा बोल रहा है। चल निकलते हैं यहां से, लेट्स गो'।
ड्राइविंग सीट पर सवार होते हुए अमित बोला। किशोर भी गाड़ी की ओर बढ़ गया।
केविन ने आसमान की तरफ देखा, उस समय लगभग रात के आठ बजे रहे होंगे। आसमान में बादल पसरे थे और उनके बीच से पूर्णमासी का चाँद झांक रहा था।
इंजन स्टार्ट होने की गरज से पूरा जंगल थर्राया।
ज़ोरदार हुंकार के साथ गाड़ी आगे बढ़ी।
गाड़ी अभी मुश्किल से सौ गज ही आगे गई होगी कि अचानक किसी झाड़ी के पीछे से छलांग लगा कर एक पहाड़ी भेड़िया गाड़ी के ठीक सामने आ गया।
यह घटना इतनी अप्रत्याशित थी कि अमित को कुछ सोच समझ पाने का मौका ही नहीं मिला। भेड़िये से टकराव को बचाने के लिए अमित ने स्टेयरिंग पूरी तरह दाएं घुमा दिया, गाड़ी के टायर रगड़ खाते हुए मुड़े। गाड़ी अमित के नियंत्रण से बाहर हो चुकी थी। अमित ने उसे संभालने का भरसक प्रयास किया लेकिन गाड़ी किसी खूंटा तुड़ा कर भागे सांड के जैसी लहराती हुई जाकर एक देवदार के विशालकाय पेड़ से टकराई। टक्कर इतनी भीषण थी कि बोनट और गाड़ी के अगले हिस्से का लगभग कचूमर बन गया। अगली सीट्स के आगे लगे एयरबैग्स खुल गए।
केविन, गुरुमंग और जुगल दादा एस यू वी की ओर लपके। एक्सीडेंट के शॉक से इशिका बेहोश हो गयी थी। अमित और किशोर दोनो के कराहने की हल्की आवाज़ आ रही थी।
गाड़ी के अगले दोनो दरवाज़े इस कदर तुड़ मुड़ गए थे कि उनका खुलना संभव नहीं था। किशोर क्योंकि पिछली सीट पर सवार था इसलिए पीछे का दरवाजा खोलकर सबसे पहले उसे बाहर निकाला गया। किशोर को हल्की फुल्की चोटें ही आई थीं।
केविन और गुरुमंग ने मिलकर अमित को अगली सीट से पीछे आने में सहायता की ताकि वो बाहर निकल सके। अमित का माथा फट गया था जिससे बुरी तरह खून बह रहा था। अमित को निकालने के बाद सबसे मुश्किल काम बेहोश इशिका को सीटबेल्ट खोलकर अगली सीट से पीछे लाना और बाहर निकालना था।
बहुत मुश्किल और मशक्कत के बाद बेहोश इशिका को भी बाहर निकाल लिया गया।
'वो कमबख्त भेड़िया कहां गया? जैसे हवा के झोंके की तरह आया था वैसे ही गायब भी हो गया'! जुगल दादा चारों तरफ देखते हुए बोला। पहाड़ी भेड़िया कहीं नजर नही आ रहा था।
'एक्सीडेंट के धमाके से भाग गया होगा'। केविन बेहोश इशिका को अपनी गोद मे उठाते हुए बोला। गुरुमंग ने अमित को और जुगल दादा ने किशोर को सहारा दिया। सभी वापस कैम्प पहुंचे।
केविन और गुरुमंग ने तीनों की मरहम पट्टी की।
'मैं शांतनु को कॉल लगाता हूँ, उसे स्थिति से अवगत कराना होगा। यहां से इन लोगों को लेकर जाना अब ज़रूरी है'। जुगल दादा ने चिंतित भाव से कहा।
'एक तो साला इस टेंट के अंदर सिग्नल नही आ रहा। मैं बाहर निकल कर ट्राई करता हूँ' जुगल दादा फोन हाथ मे लिए हुए झुंझलाकर टेंट से बाहर निकल गया।
'आहsss' इशिका के गले से हल्की कराह निकली। वो होश में आ रही थी।
'वो भेड़िया! कितना भयानक था वो'! इशिका के स्वर में घबराहट का पुट था।
'रिलैक्स इशिका, अब तुम ठीक हो। थैंक गॉड तुमलोगों को ज़्यादा चोट नही आई'। केविन इशिका को बॉटल से पानी पिलाते हुए बोला।
'मतलब किसी का सर फट जाना तुम्हारे लिए ज़्यादा चोट नहीं है! क्या चाहते हो भाई...सर धड़ से अलग हो जाए'? अमित खिसियाकर बोला।
'मेरा यह मतलब नहीं...' केविन का वाक्य अधूरा रह गया।
वातावरण में एक बेहद हृदयविदारक चीख़ गूंजी, जैसे किसी बकरे को जिबह किया जा रहा हो।
'ये तो जुगल दादा की आवाज़ है'। केविन ने चिंतित भाव से कहा और फौरन टेंट से बाहर की तरफ भागा, गुरुमंग भी उसके पीछे भागा।
'जुगल दादा! जुगल दादा!!' केविन ने बाहर निकल कर आवाज़ लगाई। गुरुमंग उसके साथ ही था। इशिका, किशोर और अमित भी तबतक गिरते पड़ते टेंट से बाहर आ गए थे।
देवदार के एक पेड़ के पीछे सरसराहट हुई।
'जुगल दादा'?
'कहीं वो पहाड़ी भेड़िया तो वापस नहीं आ गया'!
पेड़ के पीछे से निकलने वाली आकृति जुगल दादा की थी। पेड़ और झाड़ियों के पीछे से निकल रहे जुगल दादा का सर और ऊपरी धड़ नज़र आ रहा था, लेकिन जैसे ही जुगल दादा पेड़ की ओट से बाहर निकल उसे देखकर इशिका की चीख निकल गयी। अमित और किशोर भय से जड़वत हो चुके थे, केविन और गुरुमंग के मुंह से भी बोल नहीं फूट रहा था, ज़ुबान लकड़ा हो गई थी।
जुगल दादा का पेट सामने से यूं फटा हुआ था जैसे किसी ने जिपर बैग की ज़िप खोल दी हो। पेट के अंदर का सारा मलबा, अंतड़ियां बाहर लटक रही थीं।
जुगल दादा ने किसी शराबी के मानिंद झूमते लड़खड़ाते उनकी तरफ कदम बढ़ाया। झाड़ियों में, देवदार के पेड़ के पीछे फिर कुछ सरसराहट हुई। अगले ही पल एक सात फुटी आकृति देवदार के पेड़ के पीछे से निकली और सीधा जुगल दादा पर झपटी।
इसबार किसी के मुंह से चीख़ क्या सिसकारी तक ना निकली, क्योंकि जो मंज़र वो देख रहे थे वो या तो दुःस्वप्न का हो सकता था या नरक का। स्वप्न वो नहीं देख रहे उन्हें इल्म था, जिसका सीधा सा मतलब था कि नरक उनके लिए ब्लैक ऑर्किड वुड्स में नुमायां हो रहा था।
इस बार पेड़ के पीछे से निकलने वाली आकृति एक मानव भेड़िये यानी वेयरवोल्फ की थी।
पूरी हिंसकता से वेयरवोल्फ जुगल दादा पर पीछे से झपटा और अपने जबड़ों का शिकंजा उसकी गर्दन पर कस दिया। किसी सर कटे मुर्गे की तरह जुगल दादा का पूरा जिस्म फड़फड़ाया, भेड़िये ने पूरी बेरहमी से अपने पंजों में जुगल दादा की पेट से बाहर लटक रही अंतड़ियां भींच लीं। जुगल दादा के मुंह से खून का फौव्वारा छूट निकला।
मानव भेड़िया जुगल दादा के शिथिल और निष्प्राण होते शरीर को वापस झाड़ियों और पेड़ों के पीछे घसीट ले गया। कुछ देर तक सूखे पत्तों पर जुगल दादा की लाश घसीटे जाने की सरसराहट सुनाई देती रही लेकिन फिर सब कुछ शांत हो गया। वातावरण में पसरे मौत के सन्नाटे को इशिका, अमित, किशोर, केविन और गुरुमंग की धौंकनी के जैसे चलती साँसों की आवाज़ और झींगुरों का शोर भंग कर रहा था।
जाने कितनी ही देर तक वे पांचों वैसे ही बुत बने खड़े रहे।
'म..मैं समझ गया!! ये सबकुछ उस कमीने की प्लानिंग है'!! किशोर अचानक से यूं बोला जैसे सोते से जागा हो। बाकियों की तन्त्रा भी भंग हुई।
'किसकी प्लानिंग? क्या बक रहे हो'? केविन की कुछ समझ ना आया।
'तेरे गुरु की! शांतनु की'! किशोर फुफकारते हुए बोला।
'तुझे याद है ना अमित, वो बकरे की अंतड़ियां जिन्हें तेरे पेट पर चिपकाने वाला था जुगल दादा और वो वेयरवोल्फ कॉस्ट्यूम जिसे पहन कर मुझे वेयरवोल्फ बनना था'। किशोर अमित से मुखातिब हुआ।
'जुगल दादा और शांतनु ने मिलकर ये सारा ढोंग रचा है। जुगल दादा अपने ऊपर अंतड़ियां चिपका कर आ गया और पीछे से शांतनु वेयरवोल्फ का कॉस्ट्यूम पहन कर आया। ये इन लोगों की मिली भगत है'। किशोर गुस्से में चिल्ला रहा था।
'तुम्हारा दिमाग खराब हो गया है किशोर'! केविन ने उसे झिड़क लगाई।
'तू तो चुप ही रह शांतनु के चमचे! तू भी इस ड्रामे में शामिल है'।
'अब सोचता हूँ मैंने बेकार ही शान भाई को रोका उस समय, तुझे कुत्ते की तरह धोने देना चाहिए था'। केविन भावहीन ढंग से बोला।
'बस भी करो तुमलोग'! इशिका के लिए अब वो बेवजह की बहस सुन पाना नाकाबिले बर्दाश्त हो रहा था।
'ठीक है, मैं अपनी बात साबित करके दिखाता हूँ। वो अंतड़ियों वाला आइस बॉक्स और वेयरवोल्फ कॉस्ट्यूम जुगल दादा के टेंट में रखा हुआ था। अगर ये सब शांतनु का किया हुआ नाटक नहीं है तो वो चीजें अभी भी वहीं मौजूद होनी चाहिए'। किशोर जुगल दादा के टेंट की तरफ बढा, बाकी लोग भी उसके पीछे टेंट में दाखिल हुए।
वहां, आइस बॉक्स में अंतड़ियां और वेयरवोल्फ कॉस्ट्यूम अपने स्थान पर यथावत थे। उनकी स्थिति बता रही थी कि उन्हें छुआ तक नहीं गया था। किशोर के मुंह से बोल नहीं फूटा।
'अब बोल क्या बक रहा था तू'! केविन ने किशोर को ललकारा।
'ल...लेकिन ऐसा कैसे हो सकता है। व...वो वेयरवोल्फ सच कैसे हो सकता है'? किशोर ने जवाब देने के स्थान पर अपना सर दोनो हाथों से यूं पकड़ लिया जैसे उसका सर फट पड़ने को उतारू हो।
'शांतनु कहां है'? इशिका ने सोचपूर्ण ढंग से कहा।
'पता नहीं। शान भाई के जाने के बाद एक के बाद एक ऐसी घटनाएं घटती चली गईं कि मुझे उन्हें तलाशने के मौका ही नहीं मिला। लेकिन अब उन्हें ढूंढना ज़रूरी हो गया है। मैं उन्हें तलाशने जा रहा हूँ'। केविन टेंट से निकलने का उपक्रम करते हुए बोला।
'रुक जाओ। तुम अकेले नहीं जाओगे, मैं तुम्हारे साथ चलता हूँ।' किशोर बोला।
'ल..लेकिन वो वेयरवोल्फ अगर फिर से आ गया तो'! इशिका की जान सूख गई।
'मैंने शूटिंग के लिए कार बैटरीज से कनेक्ट करके टेंट के चारों ओर लाइट्स लगाई हैं। सभी लाइट्स जला लो, बाहर जल रही बोनफायर तेज़ कर लो। वो शैतान इतनी तेज रौशनी के करीब नहीं आएगा'। केविन ने गुरुमंग को निर्देश दिया।
'और अगर आया तो'? इशिका बोली।
'तो गुरुमंग है ना। इसे कम मत समझो, ये पहाड़ी लड़का बहुत हिम्मती है'। केविन ने इशिका को ढांढस बंधाया और आगे बढ़ गया। किशोर भी उसके साथ हो लिया।
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रात का लगभग एक बज चुका था। केविन और किशोर को गए हुए काफी समय हो गया था, ना ही दोनों वापस आये ना उनमे से किसी का फोन लग रहा था।
'मुझे लू जाना है'। इशिका ने झिझकते हुए कहा।
'स...सुबह तक रुक नही सकती'। अमित मरी हुई आवाज़ में बोला।
'पागल हुए हो क्या! चलो मेरे साथ'!
'मुझे लू नहीं जाना, तुम जाओ'।
'तुम एक अकेली लड़की को इस सुनसान में, आधी रात में उस हैवान का शिकार बनने के लिए अकेला छोड़ दोगे'!!
'अकेली लड़की! क्या बात है! अब जेंडर इक्वेलिटी, फेमिनिज़्म कहां चले गए'?
'बकवास मत करो। बी ए मैन'
'आई वुड प्रेफर बीइंग लेस ऑफ ए मैन रादर देन बीइंग ए डेड मैन और वैसे भी हॉरर फिल्म्स, पल्प फिक्शन नॉवेल्स में तुमने देखा ही होगा कि लू जाने वाली लड़की ही पहले मारी जाती है'।
'वाओ! व्हाट ए ब्राइट थॉट, वाय डोंट यू शोव इट अप वेयर द सन डज़न्ट शाइन सो ब्राइट'। इशिका अमित को खा जाने वाली निगाहों से घूरते हुए बोली और पैर पटकती हुई टेंट के बाहर निकल गई। झक मारकर अमित को भी उसके पीछे जाना पड़ा।
गुरुमंग ने अबतक कैम्प के चारों ओर लाइट्स जला दी थीं और बोनफायर भी तेज कर दिया था, अब उस स्थान पर काफी रौशनी थी।
अमित और इशिका को निकल कर जंगल की तरफ जाता देख गुरुमंग परेशान हो गया।
'डोंट गो। डोंट गो। भेड़िया आ जाएगा'। गुरुमंग टूटी फूटी हिंदी इंग्लिश खिचड़ी में बोला।
'तू अपना काम कर बे पहाड़ी चूज़े! भेड़िया आएगा तो सबसे पहले तेरा टेंटुआ मरोड़ेगा'। अमित ने भुनभुनाते हुए गुरुमंग को कोसा और इशिका के पीछे बढ़ गया।
इशिका झील के किनारे पहुंची। अमित उससे कुछ पीछे ही था।
'ठहरो! तुम वहीं रुको, मैं लू होकर आती हूँ और ध्यान रखना कि वो वेयरवोल्फ ना आए। अगर उसने मुझे खाया ना तो चुड़ैल बनकर तेरा खून पी जाऊंगी मैं'। इशिका ने एक सांस में बोला। झील के पास ही एक झाड़ी के पीछे चली गई वो।
अमित झील से पहले ही कुछ दूरी पर रुक गया था।
'हुँह! ध्यान रखना कि वेयरवोल्फ ना आए'। अमित इशिका के बोलने के अंदाज़ की नकल करते हुए बोला।
'वेयरवोल्फ ना हुआ मेरा रिश्ते का साला हो गया जो मेरा लिहाज़ करेगा। अरे जल्दी कर कमबख्त, अब तो डर के मारे मुझे भी आने लगी'! अमित दूर से ही इशिका से बोला। उसका कोई जवाब ना आया।
अमित थोड़ा आगे बढ़ा, उसी समय उसे अपने पीछे कुछ सरसराहट सुनाई दी।
इशिका झाड़ियों से निकल ही रही थी कि उसे अमित अपनी तरफ बढ़ता दिखाई दिया लेकिन उसकी चाल में कुछ अजीब था।
'अमित यू इडियट! तुझे मैंने वहीं रुकने को कहा था ना'!
इशिका ने अमित को डांट लगाई पर अमित पर तो जैसे उसकी बात का कोई प्रभाव ही ना पड़ा हो। उसका चेहरा निस्तेज और प्राणहीन नज़र आ रहा था जैसे वो कोई चलता फिरता मुर्दा जॉम्बी हो।
इशिका का कलेजा मुँह को आने लगा।
'अ... अमित'। इशिका की आवाज़ फंस रही थी।
अमित ने मुश्किल से दो कदम आगे बढ़ाए होंगे, उसका शरीर किसी रेत के बोरे जैसा भहरा कर गिरा। उसका सर उसके धड़ से अलग होकर फुटबॉल की तरह लुढ़कता हुआ झील में जा गिरा।
ऐसा लग रहा था जैसे किसी ने टूटे हुए खिलौने की भांति अमित का टूट हुआ सर उसके धड़ के ऊपर रख दिया था और अमित का निर्जीव शरीर गिरने से ऐसा करने वाला उसके पीछे खड़ा साफ नज़र आ रहा था। वो वेयरवोल्फ था।
इशिका के मुंह से आवाज़ ना निकली, उसकी टांगे थरथराने लगी। वेयरवोल्फ बेहद इत्मिनान से उसकी ओर बढ़ने लगा जैसे उसे शिकार करने की तनिक भी जल्दी ना हो, जैसे शिकार को मारने से पहले वो उसके साथ खेलना चाहता हो।
इशिका के जहन में शांतनु की फ़िल्म का क्लाइमेक्स सीन उभरा। क्या उसका अंत वाकई वैसे होने वाला था जैसे शांतनु फ़िल्म में दिखाना चाहता था?
कहानी जारी है।
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